इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS ने पृथ्वी के पास से बनाया ऐतिहासिक गुज़र
ISS से कैद हुईं अद्भुत तस्वीरें
ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है और समय-समय पर ऐसे खगोलीय घटनाक्रम सामने आते हैं जो मानव जिज्ञासा को नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ अवसर दिसंबर महीने में देखने को मिला, जब इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS ने पृथ्वी के निकट से अपना सबसे करीबी गुजर किया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) द्वारा साझा की गई तस्वीरों और जानकारी ने इस घटना को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है।
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क्या है इंटरस्टेलर धूमकेतु?
इंटरस्टेलर धूमकेतु वे खगोलीय पिंड होते हैं जो हमारे सौरमंडल के बाहर से आते हैं। सामान्य धूमकेतु सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, लेकिन इंटरस्टेलर धूमकेतु किसी अन्य तारा प्रणाली से निकलकर अंतरिक्ष में भटकते हुए हमारे सौरमंडल में प्रवेश करते हैं।
अब तक विज्ञान जगत ने बहुत कम इंटरस्टेलर पिंडों का अवलोकन किया है, इसलिए 3I/ATLAS जैसी घटना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
3I/ATLAS: खोज और पहचान
3I/ATLAS को ATLAS (Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System) सर्वेक्षण के दौरान पहचाना गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी गति, कक्षा और दिशा इस ओर इशारा करती हैं कि यह पिंड हमारे सौरमंडल का स्थायी सदस्य नहीं है।
इसका नाम 3I इसलिए रखा गया क्योंकि यह तीसरा ऐसा पिंड माना जा रहा है जिसे इंटरस्टेलर श्रेणी में रखा गया है, जबकि ATLAS इसके खोज कार्यक्रम को दर्शाता है।
पृथ्वी के सबसे करीब कब आया?
ISS के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, 3I/ATLAS ने 19 दिसंबर को पृथ्वी के सबसे करीब से गुजर किया। इस दौरान यह लगभग 170 मिलियन मील (करीब 273 मिलियन किलोमीटर) की दूरी पर था।
हालांकि यह दूरी सुनने में बहुत अधिक लगती है, लेकिन खगोलीय पैमानों पर इसे एक करीबी गुजर माना जाता है। अच्छी बात यह रही कि इस धूमकेतु से पृथ्वी को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं था।
ISS से ली गईं अद्भुत तस्वीरें
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर कक्षा में घूमता है। यहां से अंतरिक्ष का दृश्य बेहद साफ और अवरोध रहित होता है।
ISS से ली गई तस्वीरों में 3I/ATLAS को पृथ्वी की क्षितिज रेखा, वायुमंडल की चमक और कभी-कभी ऑरोरा (उत्तरी/दक्षिणी ध्रुवीय रोशनी) के साथ देखा जा सकता है। इन तस्वीरों में धूमकेतु की चमकती पूंछ और तेज गति स्पष्ट रूप से नजर आती है।
ISS ने 2023 के बाद से चार अन्य धूमकेतुओं की तस्वीरें भी साझा की हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरिक्ष स्टेशन वैज्ञानिक अवलोकन का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह घटना?
इंटरस्टेलर धूमकेतु किसी अन्य तारा प्रणाली के निर्माण इतिहास की जानकारी अपने साथ लाते हैं। इन पिंडों के अध्ययन से वैज्ञानिक यह समझ सकते हैं कि:
अन्य सौर प्रणालियों में ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं
ब्रह्मांड में रासायनिक तत्वों का वितरण कैसा है
क्या जीवन के मूल तत्व अन्य तारकीय प्रणालियों में भी मौजूद हैं
3I/ATLAS के स्पेक्ट्रम और गति का अध्ययन करके वैज्ञानिक इसके रासायनिक संघटन और उत्पत्ति का अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या इसे पृथ्वी से देखा जा सकता था?
विशेषज्ञों के अनुसार, 3I/ATLAS बहुत अधिक चमकीला नहीं था, इसलिए इसे नंगी आंखों से देख पाना संभव नहीं था। हालांकि, शक्तिशाली दूरबीनों और पेशेवर खगोलीय उपकरणों की मदद से इसे रिकॉर्ड किया गया।
ISS से ली गई तस्वीरें इसीलिए और भी खास हैं, क्योंकि वे आम लोगों को इस दुर्लभ खगोलीय घटना की झलक देती हैं।
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सोशल मीडिया पर चर्चा
ISS और NASA से जुड़े आधिकारिक अकाउंट्स द्वारा साझा की गई पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर 3I/ATLAS ट्रेंड करने लगा। अंतरिक्ष प्रेमियों, वैज्ञानिकों और आम यूजर्स ने इन तस्वीरों को "अद्भुत", "अविश्वसनीय" और "ब्रह्मांड की सुंदरता का प्रमाण" बताया।
भविष्य में ऐसे और पिंड?
वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड में ऐसे इंटरस्टेलर पिंडों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है, लेकिन उन्हें पहचानना बेहद कठिन है। ATLAS जैसे सर्वे प्रोग्राम और आने वाले वर्षों में लॉन्च होने वाली नई दूरबीनें भविष्य में ऐसे और पिंडों की खोज में मदद कर सकती हैं।
भारत और अंतरिक्ष अनुसंधान
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भी लगातार खगोलीय घटनाओं पर नजर रखे हुए है। आने वाले समय में भारतीय वेधशालाएं और अंतरिक्ष मिशन ऐसे इंटरस्टेलर पिंडों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS का पृथ्वी के पास से गुजरना न केवल एक रोमांचक खगोलीय घटना है, बल्कि यह हमें हमारे सौरमंडल से बाहर की दुनिया को समझने का दुर्लभ अवसर भी देता है।
ISS से ली गई तस्वीरों ने यह साबित कर दिया है कि अंतरिक्ष अन्वेषण केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रेरणा और जिज्ञासा का स्रोत है। आने वाले वर्षों में जब ऐसे और पिंड हमारे
सौरमंडल से गुजरेंगे, तब मानव ज्ञान की सीमाएं और विस्तृत होंगी।


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