हरियाणा के राष्ट्रीय राजमार्गों की बदहाल स्थिति पर लोकसभा में उठा मुद्दा...
हरियाणा के हाईवे—सड़कें या संकट
हरियाणा उत्तर भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है, जो न केवल औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत कड़ी भी है। दिल्ली से जुड़ते अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग इसी राज्य से होकर गुजरते हैं। उत्तर भारत की मालवाहक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा हरियाणा की सड़कों पर निर्भर है। ऐसे में यहां के हाईवे की स्थिति सिर्फ एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश के रोड नेटवर्क का मुद्दा बन जाती है।
हाल ही में लोकसभा में इसी विषय को लेकर एक गंभीर चिंता जताई गई। सदन में हरियाणा के राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत को लेकर सवाल उठाते हुए कहा गया कि आम जनता टैक्स भी देती है, टोल भी भरती है, लेकिन इसके बावजूद सड़कें सुविधाओं से वंचित हैं और उनकी स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए बयान के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। इस मुद्दे को और भी मजबूत आधार तब मिला जब लोकसभा में इस पर विवेचना की गई और हाईवे की जर्जर स्थिति को त्वरित सुधारने की मांग की गई।
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सदन में उठी आवाज: सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश
लोकसभा सत्र की लाइव तस्वीरों में देखा गया कि सांसदों ने स्पष्ट रूप से सरकार का ध्यान हरियाणा के राष्ट्रीय राजमार्गों की बिगड़ती हालत पर आकर्षित किया।
उन्होंने कहा—
“जनता टैक्स भी देती है, टोल भी भरती है, लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं मिलतीं। सरकार ने बड़े-बड़े दावे तो किए, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत सबके सामने है।”
इस वक्तव्य ने न केवल सरकार को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि हाईवे निर्माण और रखरखाव की मौजूदा प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए।
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हरियाणा के हाईवे की ग्राउंड स्थिति: जनता की पीड़ा
हरियाणा से गुजरने वाले कई मुख्य हाईवे जैसे—
NH-44 (दिल्ली–अंबाला–अमृतसर मार्ग)
NH-9 (दिल्ली–रोहतक–हिसार–सिरसा)
NH-48 (दिल्ली–गुरुग्राम–जयपुर)
NH-703, NH-352, NH-709
इनमें से कई मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे, टूटे हुए हिस्से, अधूरे फ्लाईओवर, अव्यवस्थित कट, और जलभराव जैसी समस्याएँ लम्बे समय से देखने को मिल रही हैं।
इन खराब सड़कों की वजह से—
दुर्घटनाओं में वृद्धि
ट्रैफिक जाम
यात्रियों को परेशानी
लॉजिस्टिक समय में वृद्धि
व्यापार को नुकसान
एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएँ प्रभावित
जैसे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।
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टोल टैक्स विवाद क्या है?
सांसद द्वारा उठाया गया एक अहम मुद्दा यह भी था कि—
“जब सड़कें ठीक नहीं हैं, तो टोल क्यों वसूला जा रहा है?”
जनता का तर्क है कि—
टोल टैक्स केवल तभी उचित है जब सड़कें 27/7 मेंटेन, स्मूद और सुरक्षित हों।
खराब सड़क के बदले टोल लेना सीधा-सीधा उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
हरियाणा में कई टोल प्लाज़ा ऐसे हैं जहाँ सड़कें बेहद खराब होने के बावजूद भारी शुल्क लिया जा रहा है। इससे नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
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सरकार के दावे बनाम जमीन की हकीकत
केंद्र और राज्य सरकारें कई बार फास्टट्रैक निर्माण, नए एक्सप्रेसवे, स्मार्ट हाईवे, और विश्वस्तरीय सड़क ढांचों के दावे करती रही हैं। लेकिन लोकसभा में उठे मुद्दे ने एक बार फिर दिखा दिया कि विज्ञापनों और हकीकत में फर्क है।
सरकार के दावे—
“100% हाईवे क्वालिटी चेक”
“सड़क दुर्घटना में कमी”
“NHAI द्वारा नियमित मरम्मत”
“विश्वस्तरीय हाईवे”
जमीन पर स्थितियाँ—
कई हाइवे पर महीनों से गड्ढे
मरम्मत का अधूरा काम
स्ट्रीट लाइट्स बंद
बारिश में जलभराव
फिसलन वाली सड़कें
निर्माण में देरी
ये सब मिलकर विकास के दावों को सवालों के घेरे में रखते हैं।
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जनता के अनुभव: शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं
फतेहाबाद, रोहतक, झज्जर, पानीपत, सोनीपत, अंबाला, कुरुक्षेत्र जैसी जगहों से प्रतिदिन शिकायतें आ रही हैं कि—
“सड़कें ऐसी हैं मानो खेतों का रास्ता हो।”
“बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं।”
“टोल पर पैसे लेते हैं, लेकिन सड़कें टूट रही हैं।”
“हादसों का खतरा बढ़ गया है।”
लंबी दूरी वाले ड्राइवरों की परेशानी और भी ज्यादा है। उन्हें हर रोज़ खराब सड़कों पर ट्रक लेकर गुजरना पड़ता है, जिससे—
गाड़ियों की खराबी
ईंधन खपत में वृद्धि
समय की बर्बादी
वित्तीय नुकसान
होता है।
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विशेषज्ञों की राय: खराब सड़कों के पीछे कई कारण
सिविल इंजीनियरों और सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे की यह स्थिति कई वजहों से पैदा होती है—
1. मानक से कम गुणवत्ता वाला निर्माण
2. ठेकेदारों पर ढीली निगरानी
3. भारी वाहनों का अत्यधिक दबाव
4. नियमित मरम्मत की कमी
5. सड़क किनारे जल निकासी व्यवस्था का अभाव
6. भ्रष्टाचार और ठेके की अनियमितताएँ
यदि इन कारणों को नियंत्रित न किया जाए तो सड़कें कितनी भी बार बनें, जल्दी खराब हो जाती हैं।
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लोकसभा में रखी गई मुख्य मांगें
सांसद ने सरकार से स्पष्ट मांग रखी कि—
1. हरियाणा के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की तत्काल मरम्मत की जाए।
2. NHAI अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
3. टोल टैक्स की समीक्षा हो – सड़क खराब हो तो टोल स्थगित किया जाए।
4. सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ा निरीक्षण किया जाए।
5. लंबित प्रॉजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
6. जनता को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अधिकार दिया जाए।
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लोकसभा सत्र की तस्वीर: राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा
साझा की गई तस्वीर में लोकसभा पूर्ण रूप से सक्रिय दिखाई दे रही है। सदन के मध्य में यह मुद्दा रखा जाना इस बात का प्रमाण है कि समस्या सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व रखती है। संसद में राष्ट्रीय राजमार्गों पर चर्चा होने का अर्थ है कि यह देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
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सरकारी जवाब की प्रतीक्षा
मुद्दा उठाने के बाद अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि—
क्या सरकार तत्काल कोई कार्रवाई की घोषणा करेगी?
क्या NHAI को निर्देश जारी होंगे?
क्या टोल नीति में सुधार आएगा?
क्या सड़क निर्माण कंपनियों पर कार्रवाई होगी?
जनता और क्षेत्रीय प्रतिनिधि दोनों उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द कोई ठोस कदम उठेगा।
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निष्कर्ष: हाईवे सुधारना समय की मांग
हरियाणा के हाईवे किसी एक जिले या क्षेत्र की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश की धड़कन हैं।
यदि ये हाईवे खराब होंगे, तो—
अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी
परिवहन उद्योग को झटका लगेगा
यात्राओं की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी
जनता का विश्वास टूटेगा
लोकसभा में यह मुद्दा उठाया जाना सराहनीय कदम है। अब जरूरी है कि सरकार इस पर तात्कालिक और प्रभावी कार्रवाई करे ताकि हरियाणा की सड़कें फिर से अपनी पहचान वापस पा सकें।
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