सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री
निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और रखरखाव को लेकर लंबे समय से गंभीर प्रश्न उठते रहे हैं, लेकिन केरल में नेशनल हाईवे-66 (NH-66) का बार-बार धंस जाना अब एक बड़े बुनियादी ढांचे के संकट का रूप ले चुका है। कोट्टियाम, कोल्लम में शनिवार को अचानक सड़क धंसने की घटना ने न सिर्फ लोगों को डरा दिया, बल्कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए राजमार्ग की गुणवत्ता पर भी तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के दौरान चार वाहन फंस गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
यह घटना तब और चौंकाने वाली बन जाती है जब यह देखते हैं कि उस समय क्षेत्र में न बारिश थी और न ही कोई प्रतिकूल मौसम। इसके बावजूद एंबैंकमेंट का बड़े पैमाने पर धंस जाना, मिट्टी का कटाव और सड़क का अचानक ढह जाना इस ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं निर्माण प्रक्रिया में गंभीर खामियां रही हैं।
बीते दो महीनों में NH-66 पर यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले कुट्टक्कल के पास पूरा एंबैंकमेंट धंसकर धान के खेत में समा गया था। लगातार हो रहीं इन घटनाओं ने NH-66 को एक "टिक-टिक टाइम बम" की तरह बना दिया है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकता है।
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घटना का पूरा विवरण
घटना शनिवार सुबह लगभग 11 बजे के आसपास हुई जब NH-66 के कोट्टियाम स्थित एक हिस्से में अचानक बड़ी दरारें दिखने लगीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि देखते ही देखते सड़क के नीचे की मिट्टी तेज़ी से खिसकने लगी और कुछ ही मिनटों में सड़क का बड़ा हिस्सा गड्ढे में तब्दील हो गया।
इस दौरान चार वाहन—एक टैक्सी, एक निजी कार, एक ऑटो और एक छोटी वैन—धंसते क्षेत्र में फंस गए। गनीमत रही कि पास खड़े लोगों ने ड्राइवरों को चेतावनी दे दी और सभी वाहनों में बैठे लोग सुरक्षित बाहर निकल आए।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क का करीब 20–25 मीटर लंबा हिस्सा पूरी तरह धंस चुका था। आसपास का निर्माण मलबा बिखरा हुआ दिखाई दे रहा था, और एक तरफ से एंबैंकमेंट खिसककर नीचे की ओर बह गया था।
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अब तक की जांच और प्रारंभिक अनुमान
अग्निशमन विभाग, पुलिस और NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षेत्र को बैरिकेड कर दिया।
प्रारंभिक तकनीकी रिपोर्ट में सामने आए कुछ मुख्य बिंदु निम्न हैं—
1. सड़क के नीचे का बेस कमजोर था।
इंजीनियरों के अनुसार, एंबैंकमेंट में उपयोग की गई मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर थी और कॉम्पैक्शन ठीक से नहीं किया गया था।
2. ड्रेनेज सिस्टम अधूरा और खराब।
यह क्षेत्र समुद्र के करीब है, जहां पानी का स्तर ज्यादा होता है। ड्रेनेज वॉटर-आउटलेट्स सही तरीके से नहीं बनाए गए थे।
3. कंस्ट्रक्शन स्पीड बहुत तेज रखी गई।
कई इंजीनियरों का दावा है कि समय सीमा पूरा करने के दबाव में निर्माण कंपनियों ने गुणवत्ता से समझौता किया हो सकता है।
4. मॉनसून के बाद मिट्टी कमजोर हुई।
भले ही घटना सूखे दिन हुई, लेकिन मॉनसून के समय पानी रिसकर मिट्टी को भीतर से कमजोर कर सकता है।
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इससे पहले भी हुई थी बड़ी घटना
कुट्टक्कल (मलप्पुरम) में दो महीने पहले NH-66 का एक बड़ा हिस्सा धंसकर गायब हो गया था। उस घटना का भी कारण ढीला एंबैंकमेंट, खराब जल-निकासी व्यवस्था और सामग्री की निम्न गुणवत्ता बताई गई थी।
यह लगातार हो रहीं घटनाएं किसी अपवाद का हिस्सा नहीं बल्कि सिस्टम की खामियों का नतीजा प्रतीत होती हैं।
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स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
NH-66 पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से निर्माण गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दी जा रही थीं, लेकिन संबंधित एजेंसियों ने ध्यान नहीं दिया।
एक स्थानीय दुकानदार ने बताया:
“हम कई बार अधिकारियों को सड़क में दरार दिखाकर बोले थे, लेकिन उन्होंने कहा कि यह ‘सामान्य’ है और सब ठीक हो जाएगा। अब देखिए—पूरा हिस्सा ही धंस गया।”
दूसरे निवासी ने बताया कि निर्माण के दौरान 'अति तेजी' और 'असंगत कार्यशैली' को लेकर लोग लगातार असंतुष्ट थे।
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विपक्ष के आरोप – भ्रष्टाचार और खराब निर्माण गुणवत्ता
कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और सड़क परिवहन मंत्रालय पर तीखा हमला बोला है।
पोस्ट में आरोप लगाया गया:
NH-66 के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ।
जो कार्य करोड़ों में दिखाया गया, असल में उस पर बहुत कम खर्च हुआ।
घटिया सामग्री का उपयोग किया गया।
जनता के पैसे से बना राजमार्ग "टिक-टिक टाइम बम" बन गया है।
कांग्रेस का कहना है कि NH-66 जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इतनी लापरवाही और गलतियां "अक्षम्य" हैं।
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सरकार और NHAI का पक्ष
सरकारी स्तर पर अभी आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं दिया गया है, लेकिन NHAI अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा—
“फ़िलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि घटना किस वजह से हुई। विस्तृत तकनीकी अध्ययन के बाद ही कारण स्पष्ट होंगे।”
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राजनीतिक विवाद तेज — मंत्री पर भी निशाना
पोस्ट में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री पर भी सीधे तौर पर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि मंत्रालय निर्माण गुणवत्ता पर कार्रवाई नहीं कर रहा है और ठेकेदारों पर कोई सख्ती नहीं दिखा रहा।
राजनीतिक स्तर पर यह मामला गरम हो गया है और आने वाले दिनों में संसद से सड़कों तक बहस छिड़ने की संभावना है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेषज्ञों की टिप्पणी
कई सिविल इंजीनियरों और इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों ने NH-66 पर लगातार हो रही घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है।
उनके अनुसार—
1. Coastal Soil ज़ोन में NH-66 जैसा प्रोजेक्ट अत्यधिक संवेदनशील होता है।
मिट्टी पहले से ही ढीली होती है, इसलिए गुणवत्ता का और अच्छे से ध्यान रखना जरूरी है।
2. Geo-technical टेस्ट ठीक से नहीं किया गया हो सकता है।
यदि मिट्टी की सही जांच नहीं हो, तो ऐसे हादसे होना तय है।
3. ड्रेनेज वॉटर मैनेजमेंट NH-66 पर बड़ी समस्या है।
बारिश के पानी का दबाव एंबैंकमेंट को कमजोर कर सकता है।
4. कंस्ट्रक्शन ऑडिट सिस्टम कमजोर है।
निर्माण के दौरान इंडिपेंडेंट क्वालिटी चेक जरूरी हैं, जो अक्सर कागजों में ही होते हैं।
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जनता की सुरक्षा को लेकर चिंताएं
NH-66 देश के सबसे भीड़भाड़ वाले हाईवे में से एक है।
रोजाना लाखों वाहन इसे उपयोग करते हैं।
भारी ट्रक और कंटेनर यातायात भी इसी मार्ग से गुजरता है।
सड़क का बार-बार धंसना एक संभावित बड़ी त्रासदी की ओर इशारा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अगले किसी मौके पर समय रहते लोगों को चेतावनी न दी गई, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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राजमार्ग निर्माण में गुणवत्ता की गिरावट — क्या कहा रिपोर्ट्स ने?
देश में NHAI के कई हाईवे प्रोजेक्ट्स पर पिछले कुछ वर्षों में निर्माण गुणवत्ता की शिकायतें सामने आई हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स और CAG की कुछ टिप्पणियों में कहा गया था कि—
टेंडर की राशि बढ़ाई जाती है
मगर वास्तविक निर्माण पर कम खर्च होता है
मॉनिटरिंग कमज़ोर रहती है
और समय सीमा के दबाव में काम जल्दबाज़ी में होता है
NH-66 की लगातार खराब होती स्थिति ऐसे ही आरोपों की पुष्टि करती दिखाई देती है।
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सड़क धंसने की तकनीकी वजहें — सरल भाषा में
नीचे वे सामान्य तकनीकी वजहें हैं जिनसे सड़क धंसती है:
1. कमजोर एंबैंकमेंट (Weak Embankment)
जिस मिट्टी पर सड़क बनाई जाती है, वह मजबूत न हो तो सड़क आसानी से धंस जाती है।
2. गलत कॉम्पैक्शन (Improper Compaction)
मिट्टी को ठीक से दबाया न जाए तो समय के साथ वह ढीली हो जाती है।
3. जल निकासी का अभाव
बारिश का पानी नीचे भरकर मिट्टी को खोखला कर देता है।
4. भारी ट्रैफिक का दबाव
यदि मिट्टी कमजोर हो और ट्रैफिक भारी, तो सड़क पर तनाव बढ़ता है।
5. समुद्र के पास की ढीली मिट्टी
केरल जैसे राज्यों में मिट्टी अक्सर अधिक नमीदार और कमजोर होती है।
NH-66 पर यह सभी कारण सामूहिक रूप से देखे जा रहे हैं।
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सरकार क्या कर सकती है — विशेषज्ञ सलाह
पुनर्निर्माण से पहले गहराई तक मिट्टी का परीक्षण
ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई
स्वतंत्र एजेंसियों से गुणवत्ता जांच
ड्रेनेज सुधार
हाईवे सुरक्षा ऑडिट
जनता को समय-समय पर अपडेट देना
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अगले कुछ दिनों की योजना
अधिकारियों ने फिलहाल NH-66 के प्रभावित हिस्से को बंद कर दिया है।
वैकल्पिक मार्ग बनाए जा रहे हैं।
जियोटेक्निकल सर्वे टीम मौके पर पहुंच चुकी है।
धंसे हिस्से की मरम्मत में एक महीने से अधिक समय लग सकता है।
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निष्कर्ष
NH-66 पर लगातार दो बार सड़क धंसना सामान्य घटना नहीं है। यह बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग और प्रशासनिक विफलता का संकेत देता है। सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग इतनी जल्दी कैसे टूट जाते हैं, वह भी सूखे मौसम में?
सरकार, विपक्ष, स्थानीय प्रशासन और NHAI — सभी पर जिम्मेदारी बनती है कि वे मिलकर वास्तविक
कारणों तक पहुंचें और सुनिश्चित करें कि ऐसी गंभीर घटनाएं दोबारा न हों।
फिलहाल केरल की जनता चिंतित है और NH-66 की सुरक्षा पर भरोसा डगमगा चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले पर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद देखने की संभावना है।

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